सोनभद्र में शिक्षा का गिरता स्तर – जिम्मेदार कौन?
सोनभद्र जिले में सरकारी विद्यालयों की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। शिक्षा का स्तर गिरने की सबसे बड़ी वजह विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। जो शिक्षक मौजूद हैं, वे भी बच्चों को पढ़ाने के बजाय गैर-शैक्षिक कार्यों में उलझे रहते हैं।कभी बीएलओ का काम, कभी सर्वेक्षण, कभी राशन वितरण, तो कभी एमडीएम की जिम्मेदारी। इतना ही नहीं, विद्यालय की रंगाई-पुताई से लेकर विभागीय बैठकों, संकुल और बीआरसी मीटिंग्स तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लगातार व्यस्तता रहती है।बैंक के चक्कर और फाइलों का ढेर शिक्षक के असली कार्य – बच्चों को पढ़ाने – में सबसे बड़ी बाधा बन गया है। सवाल यह है कि शिक्षक पढ़ाएं या प्रशासनिक कार्य करें?इन तमाम जिम्मेदारियों के बीच शिक्षकों की निजी जिंदगी और परिवार भी प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी? क्या शिक्षा विभाग और सरकार इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देगी?