जांच के नाम पर खानापूर्ति? हर साल निरीक्षण, फिर भी मनमानी जारी

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विद्यालयों में मनमानी पर अभिभावकों का आक्रोश, जांच पर उठे सवाल

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दुद्धी/कोन (सोनभद्र): क्षेत्र के निजी विद्यालयों में बढ़ती अनियमितताओं को लेकर अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। अभिभावकों का आरोप है कि कुछ विद्यालयों द्वारा किसी विशेष प्रकाशन की महंगी किताबें अनिवार्य रूप से लागू की जा रही हैं और इन्हें केवल एक चिन्हित दुकान से ही खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। यही स्थिति विद्यालयी ड्रेस को लेकर भी है, जहां एक ही निर्धारित दुकान से खरीदने का दबाव बनाया जाता है।अभिभावकों का कहना है कि इससे उन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही क्षेत्र में संचालित कई प्राइवेट विद्यालयों में बिना प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। नियमों के अनुसार विद्यालयों में योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य होती है, लेकिन इसके बावजूद कई स्कूलों में मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।इसी बीच यह भी सामने आया है कि क्षेत्र के कई विद्यालय ऐसे हैं, जिनकी मान्यता केवल कक्षा 5 तक है, लेकिन वे कक्षा 10 तक पढ़ाई करा रहे हैं। दुद्धी और कोन क्षेत्र में ऐसे कई मामलों की चर्चा है। इसके अलावा कई विद्यालयों के भवन भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, फिर भी उनका संचालन धड़ल्ले से जारी है।

अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि हर वर्ष संबंधित विभाग द्वारा जांच तो की जाती है, लेकिन “पैसों के खेल” के चलते कार्रवाई नहीं हो पाती और जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है।स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष व गहन जांच कर दोषी विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

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